Sunday, 1 May 2011

क्या नाम हे अपने अल मित्र की जीवन हे
चारू चन्द्रे की चंचल किरणों
केलरही हे चल ढल में
सोचे चान्दिनी बिची उ हिहे
अवनी ओंर अम्बर ढल में
पुलक प्रक्द करती थार्थी
मानों ज़ूम रहे हे तुमसे मंथ परम की जोम्कोम से
നല്ല കവിത അല്ലെ
قفل حال

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